तुम्हारे निकट क्या है
मैं नहीं जानता
लेकिन मेरे पास एक वीणा है
जो बज उठती है
प्राण की लय में
अमावस की गहन
रेतीली बर्फ में
पौ फटती है
मैं कहीं दूर चला जाता हँू
तब स्वर शर से बिंधा
मेरा मन आल्हादित होकर
उठा लेता है
पूरा आसमान कंधों पर
और यूँ ही
ढ़ोया करता हूँ
मीलों कच्चे-पक्के सपने
लगता है कि शब्द
ताल देते हैं
जब भावना का विहग
उतरता है
खुली अटारी पर
और
मस्त होकर नाचता है।
मैं नहीं जानता
लेकिन मेरे पास एक वीणा है
जो बज उठती है
प्राण की लय में
अमावस की गहन
रेतीली बर्फ में
पौ फटती है
मैं कहीं दूर चला जाता हँू
तब स्वर शर से बिंधा
मेरा मन आल्हादित होकर
उठा लेता है
पूरा आसमान कंधों पर
और यूँ ही
ढ़ोया करता हूँ
मीलों कच्चे-पक्के सपने
लगता है कि शब्द
ताल देते हैं
जब भावना का विहग
उतरता है
खुली अटारी पर
और
मस्त होकर नाचता है।
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