मैंने मानवता को मरते देखा है
पग-पग पर रक्त बहते देखा है
इन्सानियत सिसकती दम तोड़ती,
इन्सान को हैवान बनते देखा है
जो थे नियत घर की रक्षा हेतु
उन्हें ही चमन में आग लगाते देखा है
माँ बहनों की चीख पुकारें
उनकी अस्मत अपनों से लुटते देखी है
ईमानदार भूखे मरते देखे मैंने
बेईमानों को मौज मनाते देखा है
विद्वान पग-पग पर होते लांच्छित
मूर्खों की इज्जत होते देखा है
देश-भक्तों को नित लगती फाँसी
गद्दारों को गद्दी पाते देखा है
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